नई दिल्ली/न्यूज़ सर्विस
भारत में महंगाई दर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। ताज़ा सरकारी डेटा के मुताबिक, फरवरी महीने में होलसेल महंगाई (WPI) और रिटेल महंगाई (CPI) दोनों में बढ़ोतरी हुई है। सरकार की तरफ़ से जारी डेटा के मुताबिक, हालांकि महीने-दर-महीने के आधार पर सब्ज़ियों की कीमतों में कमी आई है, लेकिन यह बढ़ोतरी खाने-पीने और नॉन-फूड चीज़ों की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से हुई है। डेटा से साफ़ पता चलता है कि आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ने वाला है।
फरवरी में होलसेल महंगाई दर 2.13 परसेंट थी, जो जनवरी के 1.81 परसेंट से काफ़ी ज़्यादा है। कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह बेसिक मेटल, मैन्युफैक्चर्ड सामान, टेक्सटाइल और खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों में बढ़ोतरी थी। सिर्फ़ खाने-पीने की चीज़ों को देखें तो WPI फ़ूड इंडेक्स बढ़कर 1.85 परसेंट हो गया।
ANI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में रिटेल महंगाई 3.21 परसेंट दर्ज की गई। ग्रामीण इलाकों में यह 3.37 परसेंट और शहरी इलाकों में 3.02 परसेंट रही। जनवरी के मुकाबले टमाटर, मटर और फूलगोभी जैसी सब्जियों की कीमतों में गिरावट ही एकमात्र राहत थी। हालांकि, टोटल फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) अभी भी पिछले साल के लेवल से ऊपर 3.47 परसेंट पर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई का असर बड़े राज्यों में एक जैसा नहीं है। तेलंगाना, राजस्थान, केरल, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल, जिनकी आबादी 50 लाख से ज़्यादा है, में सबसे ज़्यादा महंगाई दर्ज की गई है।
भारत में, होलसेल प्राइस इंडेक्स का डेटा डायरेक्टरेट ऑफ़ पब्लिक एंटरप्राइजेज हर महीने की 14 तारीख को जारी करता है। यह डेटा देश भर में चुनी हुई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और इंस्टीट्यूशनल सोर्स से इकट्ठा किया जाता है। रिटेल महंगाई का डेटा मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन जारी करता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर US-इज़राइल-ईरान युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इससे पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी, माल ढुलाई का खर्च बढ़ना और फल-सब्जियों समेत ज़रूरी चीज़ों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।



