संभाजीनगर/दाई. मूलनिवासी न्यूज़ सर्विस
संभाजीनगर में सेक्स डिटरमिनेशन और गैर-कानूनी अबॉर्शन में शामिल एक गैंग का भंडाफोड़ हुआ है। इस घटना से संभाजीनगर में हलचल मच गई है। शहर में सेक्स डिटरमिनेशन और गैर-कानूनी अबॉर्शन में शामिल गैंग के एक नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में एक कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना में पता चला है कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाला कर्मचारी डॉ. संतोष सोनवणे के गैंग का कॉन्टैक्ट नंबर उन परिवारों को दे रहा था जो सेक्स डिटरमिनेशन और गैर-कानूनी अबॉर्शन करवाने के लिए तैयार थे।
पुलिस जांच में पता चला है कि संभाजीनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन हॉस्पिटल का एक कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाला कर्मचारी संभाजीनगर में इस मामले में शामिल था। कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाला कर्मचारी सरकारी हॉस्पिटल में जांच के लिए आने वाली प्रेग्नेंट महिलाओं की जानकारी सेक्स डिटरमिनेशन और गैर-कानूनी अबॉर्शन में शामिल गैंग तक पहुंचाने का काम कर रहा था। संभाजीनगर के एक कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी शंकर अधाव को संभाजीनगर MIDC CIDCO पुलिस ने एक महिला को जेंडर आइडेंटिफिकेशन के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस रैकेट का मुख्य आरोपी रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संतोष सोनवणे अपने दूसरे साथियों के साथ अभी फरार है। संभाजीनगर पुलिस की जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, शंकर अधव हॉस्पिटल आने वाली प्रेग्नेंट महिलाओं या उनके परिवार वालों से कॉन्टैक्ट करता था। इसके बाद उनसे पूछा जाता था कि क्या वे जेंडर आइडेंटिफिकेशन के लिए तैयार हैं। अगर परिवार तैयार होता था, तो वह उन्हें डॉ. संतोष सोनवणे के गैंग का कॉन्टैक्ट नंबर देता था।
इस मामले की जानकारी 7 मार्च को हुई एक घटना से मिली है। 7 मार्च, 2026 को आरोप है कि संभाजीनगर के नारेगांव इलाके में एक शादीशुदा महिला का उसके घर में जेंडर आइडेंटिफिकेशन किया गया और फिर उसका अबॉर्शन कर दिया गया। इस घटना में जालना की एक नर्स डॉ. संतोष सोनवणे, कमल गोकुल टिंगोटे और मयूर पार्क के महालाब ड्राइवर अनिल सपकाल के शामिल होने का पता चला है। यह पूरा मामला तब सामने आया जब शादीशुदा महिला के पिता को इस बारे में पता चला। इस मामले में संभाजीनगर पुलिस ने शुक्रवार को विवाहिता के पति अरबाज फिरोज सैयद, सास आसिया फिरोज सैयद और ससुर फिरोज मंसूर सैयद, सभी नारेगांव निवासी को गिरफ्तार किया है। 3 लोगों को पुलिस हिरासत में रखा गया है। पुलिस निरीक्षक सोमनाथ जाधव और सहायक पुलिस निरीक्षक कैलाश लहाने 3 आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी अरबाज सैयद अपनी गर्भवती पत्नी को नियमित जांच के लिए नारेगांव के मनपा अस्पताल ले जाता था। उसकी पहचान शंकर आढव से हुई, जो उसी जगह पर संविदा कर्मचारी के रूप में काम करता था। कुछ दिन पहले दोनों के बीच लिंग पहचान को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बाद शंकर आढव ने अरबाज को महालैब के ड्राइवर अनिल जाधव से मिलवाया। इस संपर्क के कारण लिंग निर्धारण और गर्भपात हुआ। इस मामले में शंकर आढव की भूमिका स्पष्ट होने के बाद सहायक पुलिस निरीक्षक कैलाश लहाने ने उसे गिरफ्तार कर लिया। राज्य सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में खून की जांच का काम महालैब के जरिए किया जाता है। पुलिस जांच में पता चला है कि इस महालैब का कॉन्ट्रैक्ट अनिल जाधव की पत्नी के नाम पर है। हालांकि, यह बात सामने आई है कि असल में अनिल जाधव ही सारे लेन-देन और कामकाज देखता है। संभाजीनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के नारेगांव हॉस्पिटल में होने वाले टेस्ट भी इसी लैब से होते थे। इसी का फायदा उठाकर अनिल जाधव ने शंकर आढव को अपने कॉन्टैक्ट में लिया। शंकर आढव संभाजीनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन हॉस्पिटल में आने वाली प्रेग्नेंट महिलाओं की जानकारी इकट्ठा करके उन्हें देने के साथ-साथ उनके परिवारों को सेक्स डिटरमिनेशन के लिए तैयार करने का काम करता था। संभाजीनगर पुलिस ने बताया है कि उसे इस काम के लिए परसेंटेज के हिसाब से पेमेंट मिलती थी। संभाजीनगर म्युनिसिपैलिटी के कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों के बैंक अकाउंट की भी जांच की जाएगी। इस मामले में मुख्य आरोपी डॉ. संतोष सोनवणे, महालैब ड्राइवर अनिल जाधव और नर्स कमल टिंगोटे फरार हो गए हैं। अनिल जाधव की लैब भी अचानक बंद कर दी गई है। पुलिस को जानकारी मिली है कि डॉ. संतोष सोनवणे पहले बेल पर रिहा होने के बाद लगातार अपना घर बदल रहा है। इसलिए पुलिस फरार आरोपियों के परिवार वालों की हरकतों पर नज़र रख रही है। संभाजीनगर पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है।

